एक बार हिन्दू दोस्त ने मुझसे पूछा कि तुम्हें पता है, काबा भी हमारा ही है! मैंने कहा 'मैं कुछ समझा नहीं! आप कहना क्या चाहते हैं?' उस दोस्त ने कहा कि देखो मक्का में जो काबा है उसमें एक पत्थर लगा है और वह पत्थर ही भगवान शिव हैं और वह वहां विराजमान हैं! इसलिए तुम सब भी उन्ही की पूजा करते हो. देखो इस तस्वीर को (उसने एक तस्वीर दिखाई, जिसमें मुसलमान लोग उस पत्थर को चूम रहे थे). क्या तुम अब भी नहीं मानते कि यह पत्थर केवल मात्र पत्थर ही नहीं बल्कि भाग्वान शिव का साक्षात रूप है और तुम लोग भी इसे पूजते हो ! हालाँकि मुझे मालूम था कि वह जो कह रहा है, वह यूँ ही कह रहा है. बस बहस के तहत उसने यह कुतर्क बोला था. मैंने उस दोस्त से कहा, "दोस्त! अगर यही बात है तो तुम मुसलमान क्यूँ नहीं बन जाते और तुम भी जाओ उस पत्थर को चूमने"
मैंने यूँ ही किये गए सवाल का जवाब भी ऐसे ही दे दिया.
मुझे याद है बचपन में मेरे गाँव में मेरे हिन्दू दोस्त कहते थे कि उसके चाचा या बाबा यह कहते हैं कि तुम जिस काबा की पूजा करते हो उस्मने हमारे शिव भगवान् क़ैद है. कुछ दोस्त यह कहते कि वहां शिव जी ही हैं क्यूंकि वहां शिवलिंग लगा है!! उस वक़्त मैं कुछ भी जवाब न दे पाता क्यूँकि मुझे इस बारे में कुछ भी पता नहीं था.
जब बड़ा हुआ तो यही सवाल कुछ परिस्कृत रूप से पूजा जाने लगा कि जब इस्लाम मूर्ति पूजा के विरुद्ध है तो मुसलमान काबा की तरफ़ मुहं करके नमाज़ क्यूँ पढ़ते हैं?
खैर, मैं हिन्दू भाईयों में अज्ञानतावश, या जानबूझकर कुतर्क के ज़रिये हमेशा से पूछे गए इस सवाल का जवाब देता हूँ कि काबा में भगवान शिव हैं, या मुस्लिम काबा के पत्थर अथवा काबा की पूजा करते हैं.
सबसे पहला जवाब है:
जब आप मानते हो कि वहां (मक्का के काबा में, मुसलमानों के इबादतगाह में) शिव हैं तो आप मुसलमान क्यूँ नहीं हो जाते? (The stone you are seeing in the Kaa'ba is called Hajr-e-Aswad)
दूसरा जवाब:
काबा मतलब किबला होता है जिसका मतलब है- वह दिशा जिधर मुखातिब होकर मुसलमान नमाज़ पढने के लिए खडे होते है, वह काबा की पूजा नही करते.
मुसलमान किसी के आगे नही झुकते, न ही पूजा करते हैं सिवाय अल्लाह के.
सुरह बकरा में अल्लाह सुबहान व तआला फरमाते हैं -
"ऐ रसूल, किबला बदलने के वास्ते बेशक तुम्हारा बार बार आसमान की तरफ़ मुहं करना हम देख रहे हैं तो हम ज़रूर तुमको ऐसे किबले की तरफ़ फेर देंगे कि तुम निहाल हो जाओ अच्छा तो नमाज़ ही में तुम मस्जिदे मोहतरम काबे की तरफ़ मुहं कर लो और ऐ मुसलमानों तुम जहाँ कहीं भी हो उसी की तरफ़ अपना मुहं कर लिया करो और जिन लोगों को किताब तौरेत वगैरह दी गई है वह बखूबी जानते है कि ये तब्दील किबले बहुत बजा व दुरुस्त हैं और उसके परवरदिगार की तरफ़ से है और जो कुछ वो लोग करते हैं उससे खुदा बेखबर नहीं." (अल-कुरान 2: 144)
इस्लाम एकता के साथ रहने का निर्देश देता है:
चुकि इस्लाम एक सच्चे ईश्वर यानि अल्लाह को मानता है और मुस्लमान जो कि एक ईश्वर यानि अल्लाह को मानते है इसलिए उनकी इबादत में भी एकता होना चाहिए और अगर ऐसा निर्देश कुरान में नही आता तो सम्भव था वो ऐसा नही करते और अगर किसी को नमाज़ पढने के लिए कहा जाता तो कोई उत्तर की तरफ़, कोई दक्षिण की तरफ़ अपना चेहरा करके नमाज़ अदा करना चाहता इसलिए उन्हें एक ही दिशा यानि काबा कि दिशा की तरफ़ मुहं करके नमाज़ अदा करने का हुक्म कुरान में आया. तो इस तरह से अगर कोई मुसलमान काबा के पूरब की तरफ़ रहता है तो वह पश्चिम यानि काबा की तरफ़ हो कर नमाज़ अदा करता है इसी तरह मुसलमान काबा के पश्चिम की तरफ़ रहता है तो वह पूरब यानि काबा की तरफ़ हो कर नमाज़ अदा करता है.
काबा दुनिया के नक्शे में बिल्कुल बीचो-बीच (मध्य- Center) स्थित है:
दुनिया में मुसलमान ही प्रथम थे जिन्होंने विश्व का नक्शा बनाया. उन्होंने दक्षिण (south facing) को upwards और उत्तर (north facing) को downwards करके नक्शा बनाया तो देखा कि काबा center में था. बाद में पश्चिमी भूगोलविद्दों ने दुनिया का नक्शा उत्तर (north facing) को upwards और दक्षिण (south facing) को downwards करके नक्शा बनाया. फ़िर भी अल्हम्दुलिल्लाह नए नक्शे में काबा दुनिया के center में है.
काबा का तवाफ़ (चक्कर लगाना) करना इस बात का सूचक है कि ईश्वर (अल्लाह) एक है:
जब मुसलमान मक्का में जाते है तो वो काबा (दुनिया के मध्य) के चारो और चक्कर लगते हैं (तवाफ़ करते हैं) यही क्रिया इस बात की सूचक है कि ईश्वर (अल्लाह) एक है.
काबा पर खड़े हो कर अजान दी जाती थी:
हज़रत मुहम्मद सल्ल. के ज़माने में लोग काबे पर खड़े हो कर लोगों को नमाज़ के लिए बुलाने वास्ते अजान देते थे. उनसे जो ये इल्जाम लगाते हैं कि मुस्लिम काबा कि पूजा करते है, से एक सवाल है कि कौन मूर्तिपूजक होगा जो अपनी आराध्य मूर्ति के ऊपर खडे हो उसकी पूजा करेगा. जवाब दीजिये?
वैसे इसका तीसरा और सबसे बेहतर जवाब भी है: हदीस में एक जगह लिखा है कि "हज़रत उमर (र.अ.) यह फ़रमाते हैं कि मैं इसे चूमता हूँ, क्यूंकि इसे हमारे प्यारे नबी (स.अ.व.) ने चूमा था, वरना यह सिर्फ एक पत्थर ही है इसके सिवा कुछ नहीं, यह मेरा ना लाभ कर सकता है, ना ही नुकसान."
-सलीम खान





आज से साढ़े चौदह सौ वर्ष पूर्व अन्तिम अवतार मुहम्मद सल्ल0 ने कहा था कि हज्रे अस्वद (काला पत्थर) स्वर्ग से उतरा है (तिर्मिज़ी) और आज विज्ञान ने भी खोज करके सिद्ध कर दिया कि वास्तव में यह पत्थर जन्नती पत्थर है । इस खोज का सिहरा ब्रीटेन के एक वैज्ञानिक रिचर्ड डिबर्टन के सर जाता है जो स्वयं को मुस्लिम सिद्ध करते हुए काबा का दर्शन करने के लिए मक्का आया, वह अरबी भाषा जानता था । जब मक्का पहुंचा तो काबा में दाखिल हुआ और हज्रे अस्वद से एक टुकड़ा प्रप्त करने में सफल हो गया। उसे अपने साथ लंदन लाया और ज्यूलोजी की लिबार्ट्री में उस पर तजर्बा शुरू कर दिया। खोज के बाद इस परिणाम पर पहुंचा कि हज्रे अस्वद धरती के पत्थरों में से कोई पत्थर नहीं बल्कि आसमान से उतरा हुआ पत्थर है। और उसने अपनी पुस्तक ( मक्का और मदीना की यात्रा) में इस तथ्य को स्पष्ट किया। यह पुस्तक 1956 में अंग्रेजी भाषा में लंदन से प्रकाशित हुई।
प्रत्युत्तर देंहटाएंदेखिए (www.wathakker.com)पर प्रकाशित एक लेख।
इसी से यह बात सिद्ध हो गई कि किसी ने उसे आस्था से वहां ले जाकर नहीं डाल दिया कि वह शिव लिंग कहलाए बल्कि यह स्वर्गीय पत्थरों में से एक है। जिसे एक मुस्लिम प्रेम से चूमता है जैसे एक माता अपने बच्चे को , इसे पूजा का भी नाम नहीं दिया जा सकता। क्योंकि इसे चूमते समय किसी को लाभ की आशा अथवा हानि का भय नहीं होता। इसी लिए एक बार जब मुहम्मद सल्ल0 के एक प्यारे साथी और मुसलमानों के शासक अबूबक्र रज़ि0 काबा के पास आए तो हज्रे अस्वद को चूमते हुए कहा ( मैं जानता हूं कि तो मात्र एक पत्थर है। तू न लाभ पहुंचा सकता हैं और न हानि, यदि मैं ने मुहम्मद सल्ल0 को चूमते हुए न देखा होता तो मैं तुझे न चूमता) ज्ञात यह हुआ कि आज एक मुसलमान उस पत्थर को केवल पत्थर मान कर ही चूमता है क्योंकि वह पत्थर स्वर्गीय पत्थर है और हमारे अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्ल0 ने उसे चूमा था उन्हीं का अनुसरण करते हैं और बस।
सही कहा आपने, यह प्रमाणिक है...
प्रत्युत्तर देंहटाएंयार आपको एक बात बतलाएँ जितने भी धर्म आए ना उनका एक ही काम था जो ये कह रहे हैं उसके उलट बात करो। न क़ाबा के इलाके के लोगों को शिव का पता था और ना शिव के इलाके (कैलाश) के लोगों को मक्का मदीना पता था। यहाँ वहाँ की बातों से और अनुभवों से ये सब धर्मग्रंथ रच डाले और एक दुसरे की बात काटकर अपनी दूकान चलाने लगे। चलो यदि क़ाबा महज़ एक पत्थर है और आप उसे चूमते हैं तो हिन्दुओं ने जितने पत्थर भगवान समझ कर लगा रखे हैं उन्हें सारे मुसलमान चूमना शुरू कर दें जब आप यह कहते हो यदि क़ाबा शिव है तो वे मुसलमान क्यों नहीं बन जाते। हम मुसलमान ख़ु़द तो शादी करते हैं बीबी एक नहीं चार भी रख लेते हैं, वालिदैन भी ज़रूरी हैं हमारे लिए, समाज भी चाहिए हमें मगर बात जब अल्लाह मियाँ पे आती है तो उनको अकेला कर डालते हैं हम लोग। (अल्लाह एक है) उनसे सब पर रहम करने को कहा जाता है पर हम सब लोग याने इंसान कभी प्यारे अल्लाह मियाँ पर रहम करते हैं ? रहम करो उन पर मत लड़ो यार मत लड़ो।
प्रत्युत्तर देंहटाएंहज़रत नूह हमारे पास हैं तो वही के वही नोहा बनकर ईसाइयों के पास हैं और आप जानते हैं के हिन्दुओं के मनू ऋषि की कहानी भी सेम टु सेम। फिर हम अलग कैसे हुए ?
फ़ीअमानिल्लाह
अरे भाई...बवाल.....कभी तो सही टिप्पणी कर दिया करो....हमेशा बेमतलब टिप्पणी ही करते हो....
प्रत्युत्तर देंहटाएंकभी तो अपनी बात सही तरह से बताया करो...अरे वो ईश्वर ही क्या जो जना जाये और किसी को जने...फ़िर इन्सान और उसमें फ़र्क क्या रह गया?
दुनिया के सारे धर्मगर्न्थ इन्सानों ने लिखे सिवाय कुरआन के...वो अल्लाह का कलाम है...और ये बात हर तरह से साबित हो चुकी है...
इस्लाम को और जानने के लिये मेरे ब्लोग http://qur-aninhindi.blogspot.com पर तशरीफ़ लायें
kashif bhai aapke ghamand ki daad deta huu
हटाएंye ghamand nahi reallty hai...
हटाएंआपने अपने ब्लौग को वोट देने के लिए चार रेटिंग राखी हैं १-ज्ञानवर्धक, २-औसत, ३-ठीक है, ४-नहीं मालूम.
प्रत्युत्तर देंहटाएंमेरी राय में आपको पांचवी रेटिंग भी रखनी चाहिए 'निहायत ही घटिया'.
इन्टरनेट चलाने और ब्लौग बनाने लायक अकल आ जाने के बावजूद आपमें फिरकापरस्ती कायम है. इन सब बातों का ज़िक्र यहाँ करके आपको यह लग रहा होगा की आप बेहद अक्लमंद साबित होंगे और आप इस्लाम की बहुत बड़ी सेवा कर रहे हैं तो मैं कहूँगी की आप अभी भी सातवीं शताब्दी से आगे नहीं बढे हैं. मुझे तो लग रहा है की अनपढ़ मुसलमान से नहीं बल्कि आप जैसे पढ़े-लिखे मुस्लमान से ज्यादा खतरा है जिसे इतना इल्म नहीं है की बेसिरपैर की बातों को अपनी ब्लौग पोस्ट बनाकर सिर्फ सनसनी ही पैदा की जा सकती है, कोई लाभ नहीं मिलता.
वैसे हिन्दू एक बात पर एकमत हैं की इस्लाम दुनिया में सिर्फ १५०० साल के लिए आया है. चन्द साल बचे हैं आप लोगों को, चैन से जियें और जीने दें.
islam sirf 1400 saal k liye nahi... islam is a rays... or ye roshni jab tak hai tab tak islam rahega... or hum to chain se jina chahte hai lekin aap logo ko he samajh me nahi aa raha.. aayega.. har kafir ko aayega sirf or sirf marne k baad.. ki wo kya kar gaya.. duniya me..
हटाएंवैसे ये मानने में क्या बुराई है कि शिवलिंग काबा में है.. क्या घट जायेगा.. और आप धर्म बदलने की बात क्यों करतें है.. आप मानते है कि इश्वर एक है तो फिर सभी धर्म वाले चाहे किसी की पूजा करे अंत में तो इश्वर की ही पूजा करते है न.. जैसे आप मानते है कि जो आप कर रहे है वो श्रेष्ठ है वैसा दुसरे भी मानते है..
प्रत्युत्तर देंहटाएंवैसे अगर ग्रिनविच मीन टाइम में खामियां है तो आप कौनसा समय मानते हैं? काबा मीन टाइम?
सलीम भाई, आपकी सारी बाते १००% सही हो सकती है, मुझे कोई संदेह नहीं ! मगर आप और आपके अन्य मित्र क्या एक बात का इमानदारी से जबाब दे सकते है कि अगर इस्लाम इतना ही उच्चकोटि का धर्म था/ है, अगर इस्लाम और कुरान की शिक्षाये इतनी बेहतर किस्म की है तो इस दुनिया में अगर सारी नहीं तो ज्यादातर समस्याए फिर इस्लाम से ही क्यों जुडी है ? बड़े भाई, अन्दर क्या है वह ज्यादा अहमियत नहीं रखता, सामने व्यावहारिक पटल पर क्या दीखता है, वह ज्यादा अहमियत रखता है !
प्रत्युत्तर देंहटाएंमैं कल जब आपकी वह इस्लामिक बैंक वाली पोस्ट पढ़ रहा था तो मुझे हंसी आ रही थी, गनीमत समझो कि आप इस देश में तथाकथित अल्पसंख्यक हो इसलिए इस्लाम की खुलकर पैरवी कर पा रहे है, बहुसंख्यक हिन्दू होते और कोई हिन्दू बैंकिंग प्रणाली की बात करते तो अब तक हमारे ये ताथाकथित सेकुलर, तमाशा खडा कर चुके होते ! दुसरे शब्दों में अगर कोई हिन्दू पकिस्तान में किसी हिन्दू मान्यता की बात करता तो अब तक तो .....!
इंसाअल्हा, खुदा सबको सद्बुद्धि दे !
problem na he islam me hai or na he islam k logo me.. problem hai... dusre log jo islam ko bura karne me lage hai.. kabhi babri masjid shaheed karke.. to kabhi kisi bhi attack me muslim ka naam lekar...
हटाएंभाइयो ! मात्र मुस्लिम वह समुदाय है धरती पर जिनको अपने ईश्वर ( अल्लाह) का ज्ञान प्राप्त है। इसी लिए वह मात्र एक ईश्वर की पूजा करते हैं क्योंकि वह समझते हैं कि इस संसार का पैदा करने वाला,मानव की रचना करने वाला, विश्व को चलाने वाला मात्र एक अल्लाह है और हम सब इस धरती पर परीक्षा के लिए बसाए गए हैं एक दिन आने वाला है कि सारी सृष्टी ईश्वर के दरबार में एकत्र होगी और उनके कर्मो का लेखा जोखा लिया जाएगा- फिर या तो स्वर्ग है अथवा नरक।
प्रत्युत्तर देंहटाएंहमें सत्य का पता है और हर मुस्लिम को सत्य का ज्ञान है इसी लिए हम इन बातों को खान-पान से भी ज्यादा महत्वपूर्ण समझते हैं। इस्लाम प्रत्येक मानव का धर्म है और ज़ाहिर है कि जो लोग इसे नहीं जान रहे हैं इसका विरोध तो करेंगे ही।
आज लोग स्वयं मानव की पूजा कर रहे हैं औऱ समझ रहे हैं कि मैं ईश्वर की पूजा कर रहा हूं------ ऐसा क्यों हुआ ? मैं आपको बताता हूं अवतार की कल्पना लोगों ने अपनाई और समझने लगे कि कृष्ण जी ईश्वर का अवतार ले कर आए थे इस लिए इनकी पूजा ईश्वर की पूजा है -- लेकिन मात्र कल्पना से कोई बात नहीं बनती इस तर्क में कितना दम है इसे भी देखना चाहिए --- श्री राम शर्मा कल्कि-पुराण के 278 पृष्ठ पर अवतार की परिभाषा इस प्रकार करते हैं ( समाज की गिरी हुई दशा में उन्नती की ओर लो जाने वाला महामानव नेता) अर्थात मानव में से महान नेता जिनको ईश्वर मानव मार्गदर्शन हेतु चुनता हैं। ज्ञात यह हुआ कि ईश्वर धरती पर मानव रूप ले कर नहीं आया बल्कि मानव में से ही कुछ लोगों को संदेष्टा घोषित किया, और आकाशीय दूतों द्वारा उनपर अपना संदेश उतारा ताकि लोगों का मार्गदर्शन करें, उनको कुछ चमत्कारियां भी दी गईं जिनको देख कर लोगों ने उन्हीं को ईश्वर के रूप में मान लिया और उन्हीं की पूजा करने लगे। शायद समझ में आ गया होगा कि मुर्ति-पूजा क्यों और कैसे शुरू हुई। सब से अन्त में ईश्वर ने सम्पूर्ण मानव के मार्गदर्शन हेतु कल्कि अवतार को भेजा जो मक्का में पैदा हुए और जिनकी आगमन की प्रतीक्षा आज तक हिन्दू समाज में हो रही है हालांकि वह आ चुके -- विस्तृत जानतकारी के लिए डा0 वेद प्रकाश उपाध्याय की पुस्तक कल्कि अवतार और मुहम्मद सल्ल0 का अध्ययन कर लें ।
भाइयो !मैं कोई अलग पथ की ओर आप को निमंत्रन नहीं दे रहा हूं बल्कि यह आपकी अमानत है जिसे में आप तक पहुंचाना चाहता हूं। जो लोग इन बातों का विरोद्ध करते हैं वह वास्तव में अपने ही ईश्वर का विरोद्ध कर रहे हैं । यदि आप इन बातों पर चिंतन मनन करते हैं तो हमें इसका कोई लाभ नहीं होने वाला है आपका ही अन्तिम जीवन सुधरेगा।
आधुनिक ज्ञान के आधार पर बच्चा-बच्चा जानता है कि धरती गोल है। किसी गोल चीज का केन्द्र कहां होता है आपको पता होगी। यदि यह पता होगी तो यह भी पता होगा कि काबा धरती के केन्द्र में नहीं है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंधरती के सतह पर किसी स्थान को 'केन्द्र' कहना मूर्खता है।
@ Jyotsna जी,
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपने कहा "वैसे हिन्दू एक बात पर एकमत हैं की इस्लाम दुनिया में सिर्फ १५०० साल के लिए आया है. चन्द साल बचे हैं आप लोगों को, चैन से जियें और जीने दें.
ये आपकी और सारे सनातन (हिन्दु) समाज की बहुत बडी गलतफ़हमी है जिसको मैं दुर कर देता हूं...
कुरआन और सही हदीस में साफ़ ज़िक्र है...---- की "कयामत तब आयेगी जब मर्द और औरत खुलेआम सडंक पर "ज़िना"(सहवास) करेंगे और उस वक्त वो इन्सान जन्नत मे जायेगा जो उनसे कहेगा की ज़रा सडक के किनारे हो जाओ।
कयामत आने से पहले "दज्जाल" आयेगा जिसकी एक आंख नही होगी वो दुनिया में एक जन्नत और जहन्नुम बनायेगा और अपने आपको खुदा कहेगा....जो उसकी जन्नत में जाना कुबुल करेगा वो अल्लाह की जहन्नुम में जायेगा और जो उसको खुदा मानने से इन्कार करेगा वो उसकी जहन्नुम और अल्लाह् की जन्नत में जायेगा। वो चालीस साल राज करेगा दुनिया पर...
उसके बाद "ईसा अलैहिस्सलाम" (ईसा मसीह) दुनिया में आयेंगे और उसको खत्म करेंगे...फिर ईसाईयों को बतायेंगे की मैं अल्लाह या खुदा का बेटा नही हूं...मैं तो सिर्फ़ उनका पैगम्बर हूं....और फिर पूरी दुनिया में १०० साल तक इस्लाम की हुकुमत होगी...उसके बाद कयामत आयेगी
kya baat hai, dajjal ka design banakar dekho, haste - 2 gir jaoge....
हटाएंhad hoti hai lambi - 2 fainkane ki..?
इस ब्लोग को पढ़ा, मैं हर धर्म का सम्मान करता हूँ, और लगा शायद यहाँ इस्लाम से संबंधित कुछ अच्छा पढ़ने को मिलेगा पर पता चला कि इस्लाम के नाम पर केवल दुकान लगा रखी है, अरे भाई लोगों तर्क करने से या किसी के धर्म बदलवा लेने मात्र से धर्म का महत्व नहीं बड़ जाता है। भगवान एक है मेरा तो यही मानना है और अगर धर्म का महत्व इस्लाम समाज इतनी अच्छी तरह से समझता है तो कौन से धर्म ग्रंथ में यह लिखा है कि जाओ हत्याएँ करो, बम फ़ोड़ो, मुँबई पर हमला करो। दरअसल इस्लाम को इस्लामिक लोगों ने ही विकृत रुप देकर अपना उल्लू सीधा किया है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंकोई भी धर्म ग्रंथ कहीं भी यह नहीं कहता कि दूसरे का खून करो, सोचें और जबाब दें।
gujraat me dange or babri masjid shaheed ki gayi uske baare me aapka kya khyaal hai
हटाएंशीघ्र ही मेरा अगला लेख पढ़े "जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"
प्रत्युत्तर देंहटाएंजिहाद का मायने क्या है? क्या जिहाद का ज़िक्र कुरआन में ही है या दुसरे धर्मों की किताबों में भी है? क्या श्री कृष्ण ने भी जिहाद करने का हुक़्म दिया है या नहीं? क्या किसी एक ही काम के दो संबोधन देना उचित है अर्थात शहीद भगत सिंह को अँगरेज़ आतंकवादी कहते हैं और हम देशभक्त? आखिर कौन सही है? साध्वी प्रज्ञा को सीबीआई आतंकवादी कहती है! क्या वह वाकई आतंकवादी है? ओसामा बिन लादेन को अँगरेज़ आतंवादी कहते हैं ! क्या वह वाकई आतंकवादी है?
प्रत्युत्तर देंहटाएंइन सभी सवालों का जवाब हैं, मेरा अगला पोस्ट!!
"जिहाद का वर्णन भगवत गीता में भी"
आप तो सारे वर्णन अपने शब्दों में करते हैं जो आपको पसंद हो वो स्टेटमेंट अपने शब्दों में तोड़ मरोड़ कर लिख देते हैं, चलिये तब भी आपके अगले लेख "जिहाद..." का इंतजार है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंमियां काशिफ, तुमने बड़ी तफसील से लिखा है:-
प्रत्युत्तर देंहटाएं"कुरआन और सही हदीस में साफ़ ज़िक्र है...---- की "कयामत तब आयेगी जब मर्द और औरत खुलेआम सडंक पर "ज़िना"(सहवास) करेंगे और उस वक्त वो इन्सान जन्नत मे जायेगा जो उनसे कहेगा की ज़रा सडक के किनारे हो जाओ।
कयामत आने से पहले "दज्जाल" आयेगा जिसकी एक आंख नही होगी वो दुनिया में एक जन्नत और जहन्नुम बनायेगा और अपने आपको खुदा कहेगा....जो उसकी जन्नत में जाना कुबुल करेगा वो अल्लाह की जहन्नुम में जायेगा और जो उसको खुदा मानने से इन्कार करेगा वो उसकी जहन्नुम और अल्लाह् की जन्नत में जायेगा। वो चालीस साल राज करेगा दुनिया पर...
उसके बाद "ईसा अलैहिस्सलाम" (ईसा मसीह) दुनिया में आयेंगे और उसको खत्म करेंगे...फिर ईसाईयों को बतायेंगे की मैं अल्लाह या खुदा का बेटा नही हूं...मैं तो सिर्फ़ उनका पैगम्बर हूं....और फिर पूरी दुनिया में १०० साल तक इस्लाम की हुकुमत होगी...उसके बाद कयामत आयेगी"
फुल कॉमेडी है तुम्हारी कुरान और हदीस में कही बातें. भाईजान, कोई बेवकूफ ही इस तरह की इंडिया टी वी छाप बातों में यकीन कर सकता है. पूरी दुनिया में जब मुसलमानों की वाट लग रही है तब तो तुम्हारा अल्लाह जन्नत में हूरों के साथ रंगरलियाँ मना रहा है! कौन ऐसी बेसिरपैर की बातों में यकीन करेगा!
तुम लोग तो छोडो ये कम्प्युटर और ब्लॉगिंग वगैरह. ये कतई इस्लामी नहीं हैं. कबीलाई धर्म को माननेवाले हो तुम लोग, तुम्हें ये जादू-टोटके जैसी बातें ही समझ में आती होंगी.
दूसरों को पागल समझा है क्या?
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंJyotsna...
प्रत्युत्तर देंहटाएंyou know what ? tum islam ke kafi kareeb aa chuki ho... ab adiyal saand ki tarah mat bano. khud se pucho ke tumne kya paya yahan aa kar .. or kya follow kar rahi ho
is dikhave se dur raho... hakiqat mein tum jo thi woh ab nahi.. tum sidhi raah per ho .. kyun janbujh kar us raah per chalna chah rahi ho .. jisko shaitaniyat ki raah kehte hein... ... kisi or ki di huyee taklif kisi or jagah darshana bewakufi hei... zara dhyan se J. ... badla lene ka yeh tarika galat hei tumhara
इस्लाम तो है ही कबीलाई पन्थ/मज़हब (धर्म नहीं) आगे कुछ कहना ही व्यर्थ है।;गीता का ज़िहाद अपने ही भाइयों के विरुद्ध है,अपने ही धर्म में, उनके अन्याय के विरुद्ध;न कि अन्य धर्म के विरुद्ध,उसका आतंकवाद से तुलना मूर्खता ही है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंislam me jihaad ka matalb apne.. soul se hai .. burayi ko rokne se hai jo insaan k ander panapti hai.... or jo duniya me bisfot ho rahe hai.. ye america ka hath hai.. agar aap 1 insaan bankar(yaani dharmik na bane warna islam me he kami nazar aayegi)socho ki hamare desh par kabza kisne kiya muslim ne ya england ne.. iraq par hamla kisne kiya ruse par attack karke usko chote chote parts me kisne karwaya india ne, muslim ne nahi america ne.. jab aap apne dimag ko sahi rakhkar 1 insaan bankar socho to islam sabse acha nazar aayega.. or warna dharmik bankar.. socho ge.. to tumhe hamara kisi ko daan bhi dena bura lagega.. thanks..
हटाएंkyon pareshan hota hai?meri kament ko suresh ke blog par ja kar padhle. use maine jo jawab diya hai tu khush ho jaega.use kah dena ki ab ayodhya ki tarha kabe par halla bol ne ki taqat rakhta hai to pahle suresha ko lider banado.uski faat javegi.
प्रत्युत्तर देंहटाएंअल्हम्दुलिल्लाह की दुनिया कितनी बडी थी? क्योकि मक्का-मदीना न तो एशिया के मध्य मे है, न युरेशिया के, और न ही दुनिया के| और यह भी देखिये कि आप उत्तर दक्षिण का मध्य पता कर सकते है, पूरब - पश्चिम का नही| क्या अल्हम्दुलिल्लाह यह समझते थे कि दुनिया एक प्लेट की तरह है?
प्रत्युत्तर देंहटाएंO Katua saala shri KishenKi tulna tu Jahhad ka saath mat kar woh dhram uyudh tha woh ahchaai ka Burai se uyuth(war) tha. Osaama Bin Ladan to Nirdosho ko Maratha hai woh to Ravaan ka samman hai woh to kanse ka samman hai. Bhakti to Ravan Ne Bhi Ki thi par wo doosara bakassore Bhakto ko marta (kill) tha. ossam bin ladane bhi yahee kar raha hai aur Tuu Mujha usi ka eak Rachas danav hai chinta mat kar yeh ossama bin ladane awashey maara jayga. Islaam ka naam par bakassor logo ko marrne vala tere jase rakshas ka Bhi anat hoga. Jo atangwadi ko atangwadi nahi maanta hai. Bulki uska saath deta ho. tera jaisi Ghdaaar ko to pakada kar aur hath paer bandh kar Pagal dogs ka paas Chod dena chayia Har kisi anthakwadi Ka yahi harsh hona Chaahiya Tu Bhi unhi aatankwadiyo ma sa eak hai ba. tujha dharti par jeena ka koi adhikar nahi hai. Tera jaisa logo ka karan hi Islaam ko Anthankwadi manna jata hai aur muslimo par dought kiya jata hai.
प्रत्युत्तर देंहटाएंsaleem tara jaisa Is desh ka dushman hai jo kahta hai ki ausma bin ladane aantakwadi nahi Balki dhram uyudh kar raha hai Tujhe Bhi Jehhad ki sana ma Bharti ho janna chayia Tu Indian kahlaane ka layak Nahi hai. tumahra jaisa aantakwadiyo ko maarna ka liya hi Bhagwaan shri kishan ka Janam hota hai. Na ki tum Jaisa Pappiyoa ka saath dana ka liya
प्रत्युत्तर देंहटाएंsaleem jaroor padhna
प्रत्युत्तर देंहटाएंhttp://www.hindusthangaurav.com/books/jihad%20ke%20pralobhan%20sex%20&%20loot.pdf
Jyotsana ji ,jadu tona to aapki shaan ki hai ,har DHARMIK KAAND ke liye paisa lagana parta hai, Islam mian IBADAT karne Main kuch kharch nahi hota, aap comuter bloging internet chorne ki baat kar rahi ho,tozara ye bataye aapne in sabko apnakar kaunsa teer maar liya.bus munh na khulwaye for example TASLIM ka taaza blog padh lena, BAAT KAM KIJE ZAHANAT KO CHUPATE RAHIYE....
प्रत्युत्तर देंहटाएंसलीम साहब ! कुरान मनगढ़ंत है ,किबला लिखने वाले को ये नहीं पता था की दुनिया गोल है तुम जिधर भी पैर करो लात उसे हे दिखाओगे ,एक काम करो आज से सर नीचे और पैर आसमान तरफ के या खड़े खड़े सोया करो !
प्रत्युत्तर देंहटाएंस्वस्थ वैज्ञानिक बहस की इस्लाम में गुंजाईश कम ही दिखती है. इस्लाम का चश्मा आँखों पर चढ़ा कर और हाथ में हदीस की तलवार लेकर तर्क नहीं हो सकता. इतिहास साक्षी है कि इस्लाम ने ऐसी कितनी ही विकसित सभ्यताओं को पद दलित किया ही जो इसके विचारों से सहमत नहीं थीं. पर अब समय बदल चुका है. तर्क, दर्शन और मीमांसा को जीवन पद्धति बनाने वाला भारत-पुत्रों का समाज अतिआधुनिक सोच के साथ साथ अति आधुनिक सैन्य व्यवस्था का भी स्वामित्व रखता है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंकुतर्क और हठधर्मिता को सीमित, स्वार्थपरक सोच रखने वाले राजनितिक दल भले ही सर-माथे पर रखें, आधुनिक और विश्व-परक विचारों वाला भारतीय युवा इस के सामने अब माथा नहीं टेकने वाला.
हिम्मत जुटाएं और अपने धार्मिक ग्रंथों को तर्क की कसौटी पर कस कर देखें. उत्तर वहीँ छिपे हैं. कुतर्कों के पीछे मुंह छिपाने से 'शेख-चिल्ली' 'कालिदास' नहीं बन जाता.
hahhaahhhaaa
प्रत्युत्तर देंहटाएंaur kya kahun apki bewkufi par...
aap jaise log hi hain jo ye to mante hain ki khuda ek hai..par ye nahi mante ki usne sirf insan ko banaya hai...bantne wala to khud insan hai...apne kuran to padhi hai kintu use samajh nahi pae...aap jaise log hi hain jo antakwad ko naam jehad ka dete hain...aur puri muslim communitie ko badnam karte hain...sabse pahle aap har dharm ke granth padhe jo aapke liye mumkin hi nahi hai...kyonki hindu dharm itna vishal hai aur itna purana hai...ki aapko ise samjhne ke liye kai janam lene padenge...kyonki jo insan shri karishna ki hi mater insan manta hai uski mansikta kitni nimn sater ki hogi andaza lagana asan hai...
खुदा के वास्ते पर्दा न काबे से उठा जालिम
प्रत्युत्तर देंहटाएंकहीं ऐसा न हो यां भी वही काफिर सनम निकले...
....सनम=मूर्ति
Saleem tu siya musalman hai ya suni musalman hai? Saleem agar Hamari sarkare itne nikammi na hoti to tu itne bakwas na kar pata. Agar tujhe apane musalman hone par itna phakra hai to kise musalman desh me ja, yaha alp kyo banahua hai bahu banja, mahari roti me se hisa khata hai aur hamari dharam ko galat tharata hai.
प्रत्युत्तर देंहटाएंकोई टिप्पणी नहीं
प्रत्युत्तर देंहटाएं////////कयामत आने से पहले "दज्जाल" आयेगा जिसकी एक आंख नही होगी वो दुनिया में एक जन्नत और जहन्नुम बनायेगा और अपने आपको खुदा कहेगा....जो उसकी जन्नत में जाना कुबुल करेगा वो अल्लाह की जहन्नुम में जायेगा और जो उसको खुदा मानने से इन्कार करेगा वो उसकी जहन्नुम और अल्लाह् की जन्नत में जायेगा। वो चालीस साल राज करेगा दुनिया पर...///////
प्रत्युत्तर देंहटाएंएक आँख नहीं अपितु एक सींग कहा गया है .और शायद वो कोई और नहीं ओसामा बिन लादेन ही है सारे मुस्लिम उसकी बनाई गयी जन्नत में हिं और गैर मुस्लिम उसकी बनाई गयी जहन्नुम में .................४० वर्ष समाप्त होने वाले हैं
samay samapt nahi hoga lekin tum jaroor 40 saal k ander samapt ho h=jaoge...
हटाएं////////कयामत आने से पहले "दज्जाल" आयेगा जिसकी एक आंख नही होगी वो दुनिया में एक जन्नत और जहन्नुम बनायेगा और अपने आपको खुदा कहेगा....जो उसकी जन्नत में जाना कुबुल करेगा वो अल्लाह की जहन्नुम में जायेगा और जो उसको खुदा मानने से इन्कार करेगा वो उसकी जहन्नुम और अल्लाह् की जन्नत में जायेगा। वो चालीस साल राज करेगा दुनिया पर...///////
प्रत्युत्तर देंहटाएंएक आँख नहीं अपितु एक सींग कहा गया है .और शायद वो कोई और नहीं ओसामा बिन लादेन ही है सारे मुस्लिम उसकी बनाई गयी जन्नत में हिं और गैर मुस्लिम उसकी बनाई गयी जहन्नुम में .................४० वर्ष समाप्त होने वाले हैं
काश इस पोस्ट पर समझदार लोग भी आया करें, जब देखो तब वही घिसी पिटी बातें, पूरी दुनिया परेशान है इस शांति के प्रवाह से, आज इस धर्म का अमेरिका क्या लाभ उठा रहा है इसको समझने के लिए बचपन की एक कहानी का ज़िक्र करना समसामयिक होगा, एक जंगल में दो बिल्लियाँ जा रही थी उन्हें एक रोटी (आज की तारीख में पेट्रोल) पडी मिली उसके बटवारे के लिए दोनों में झगडा होने लगा, बात सुलझते ना देख उन्हें एक काजी की जरुरत महसूस हुई संयोग से वहां से एक बन्दर गुजर रहा था दोनों बिल्लियों ने उससे अपनी समस्या बताई उसने एक तराजू का इंतजाम किया और फिर चालाकी के साथ कभी एक टुकडा का कर देता तो ज्यादा वाले को खाकर बराबर करने का ढोंग करता फिर दूसरी को कम कर देता इस तरह वह पूरी रोटी पचा गया दोनों बिल्लियाँ अपना सा मुंह लेकर अपने अपने रास्ते चली गयी, यही हॉल अमेरिका इन मुस्लिम देशों के साथ कर रहा है कभी ईराक पर हमला करता है तुर्की, कुवैत, आदि की मदद लेकर इस बार हमला बोल दिया है लीबिया पर और मदद है खु लीबियाई विद्रोहियों की और क़तर की इस तरह मरेंगे दोनों हाल में मुसलमान ही, जब इस्लाम में हर समस्या का निदान एक किताब करने मैं सक्षम है तो इन समस्यायों को क्यों नहीं सुलझाया जा रहा, दुसरे धर्मों को सीख देने से पहले ये खुद कुछ सीख ले ले. दुनिया में इससे ज्यादा हास्यास्पद बात कुछ हो ही नहीं सकती की दुनिया को समझदारी सिखाने का दावा करनेवाले ये इस्लाम के ठेकेदार अपने ही भाइयों को समझदार नहीं बना पा रहे.
प्रत्युत्तर देंहटाएंमेरा मतलब कुछ समझदार मुस्लिम लोगों से है, चाहे वे एक प्रतिशत हों, क्योंकि हिन्दुओं में समझदार आसानी से मिल जाते है. हाँ एकाध प्रतिशत हिदू भी नासमझ हो सकते है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंहजरे अस्वद (काला पत्थर) कि हक़ीक़त
प्रत्युत्तर देंहटाएंचूँकि मेरा यह ब्लॉग केवल अंतिम रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के जीवन के सत्य तथ्यों के बयान पर आधारित है अतः मैं किसी भी अतिरिक्त लेख से परहेज़ करता हूँ एवं कोशिश यह होती है कि आप के जीवन के उन्हीं तथ्वों को बयान करूँ जो सही रवायतों पर आधारित हैं लेकिन कुछ समय पूर्व मैंने हजरे अस्वद एवं काबा के बारे में कुछ नकारात्मक विचार वाले व्यतियों जिनका ज्ञान सरल तथा गलत विचारों एवं सोंच से भरपूर है के लेख तथा उनपर कमेंट्स पढ़ा इन आलेखों में ख़ास तौर से हजरे अस्वद के बारे में जो बकवास कि गई है वोह लेखक के मानसिक बिमारी का उदहारण है काबा तथा हजरे अस्वद का तअल्लुक़ किसी सनातन धर्म अथवा शिव या शिव लिंग से क्या हो सकता है ?दर असल लेखक ने झूटे इतिहास कारों की झूटी बातों पर भरोसा करके जिनका कोई अस्तित्व नहीं है एक अफसाना तराश कर लेख का रूप दे दिया है . ऐसे लोग जिन का ज्ञान सरल तथा कमज़ोर होता है जो सत्य असत्य में अंतर नहीं कर सकते और न ही करने की कोशिश करते हैं झूटी बातों को इतिहास का रूप देनें वाले इतिहासकारो की हर सच्ची झूटी बातों को सत्य समझ कर उसपर ईमान ले आते हैं, ठीक उस अबोध बच्चे की तरह जो दादी माँ की परियों तथा देवों की कथाओं को सच समझ बैठता है और दिनों रात उन्हीं के सपने देखा करता है
चूँकि हमारे इस्लाम धर्म में किसी भी धर्म का ठठा तथा उस से सम्बंधित किसी चीज़ का मजाक उड़ाना निषेध है इसलिए मैं सनातन अथवा शिव एवं शिवलिंग की सत्यता अथवा असत्यता के बारे में कुछ नहीं कहूंगा हाँ इतना ज़रूर है कि हमारे धर्म के बारे में जो असत्य तथा अन्याय पूर्ण बातें कही जाती हैं उनका उत्तर अवश्य दिया जाए! काबा कि हकीकत के बारे में मैं इस से पूर्व लिख चूका हूँ तथा मौक़ा मिला और अल्लाह ने चाहा तो मक्का फतह करने के बयान के समय लिखूंगा
अब निम्न में हजरे अस्वद के बारे में जो सत्यता है उसे बयान कर रहा हूँ इस यकीन के साथ कि जितना ब्यान कर रहा हूँ केवल उतना ही सत्य तथा कुरआन (इश्वर के बयान) एवं हदीस (नबी की बातों तथा कार्यों) से साबित है जिन्हें आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के प्यारे साथियों रज़ीअल्लाहोअन्हुम ने देखा , सुना ,समझा तथा ब्यान किया है बाक़ी सब बे सर पैर की बातें एवं अफ़साना है , अल्लाह हमें सही सोंच दे
हजरे अस्वद क्या है ? : हजरे अस्वद काबा के दक्षनी कोने में मौजूद लाली मिला हुआ एक काला पत्थर है जो ज़मीन से डेढ़ मीटर की उंचाई पर काबा की दिवार में लगा हुआ है. यहाँ यह बताते चलें कि शुरू में हजरे अस्वद का आकार तीस सेंटी मीटर के करीब था लेकिन अनेक घटनाओं की वजह से उस में परिवर्तन आता गया तथा अब अनेक साईज़ के केवल आठ छोटे छोटे टुकड़े बचे हैं जिन में सब से बड़ा छोहारे के आकार का है , यह तमाम टुकड़े करीब ढाई फिट के कुतर में जड़े हुए हैं जिनके किनारे चांदी के गोल चक्कर घेरे हुए है. इस की हिफाज़त के लिए सब से पहले जिसने उसे चांदी से गच दिया वो अब्दुल्लाह बिन जुबैर रज़ियल्लाहो अन्हो हैं फिर बाद के राजाओं महाराजाओं ने भी उस में सोने तथा चांदी मढ़वाये सब से अंत में सउदी अरब के राजा शाह सऊद ने इसे खालिस चांदी से मढ़वाया.
इस्लामी ईतिहास में हजरे अस्वद से एक नेहायत ही दुखद घटना जुडी हुई है, अबू ताहिर क़र्मोती (जिस का सम्बन्ध क्रामेता नामी शीई धर्म से था ) नाम के एक आक्रमणकारी ने सन ३१७ हिजरी में मक्का पर आक्रमण करके मक्का की पवित्रता को भंग कर दिया एवं काबा की बेहुरमती की एवं हाजियों को मार कर ज़मज़म के कुंवे में डाल दिया,तथा ज़मज़म के कुब्बे को गिरा दिया एवं काबा की दिवार को गिरा दिया तथा काबा की चादर को फाड़ कर अपने साथिओं में बाँट दिया एवं हजरे अस्वद को निकाल कर अपने साथ ले गया . बाईस वर्ष बाद सन 339 हिजरी में फिर दोबारा उसको उसके स्थान पर लौटा दिया गया
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http://abdulaleemsalafi.blogspot.com/2010/08/blog-post_7741.html
every thing written at quran is found at other religious book and scientifically it is possible that your paigambar can copy and past it to quran becouse it is unbelievable that god tell hole story to paigambar
प्रत्युत्तर देंहटाएंsanatan dharm kabhi bhi khatm na hone bala dharm hai, muslimo ne jehad ka naam lekar jabran dharm change karbaya, chenge na karne par hatya kar di sanatan dharm (hindu) dharm k nast karne ki poori kshish ki lekin kar na sake koshish aaj bhi jaari hai, lekin jis din sanatan (hindu)dharm ne soch liya ki .... tab muslim jaroor nahi bachege. upar ek kament me likha hai ki ek din sabhi log islam dharm apnayege tab pralay ayegi dekha aap logo ne matlab bhagban ne is dharm ko pratibandhit kar rakha hai isko koi bhi nahi apnayega or to or islam jis rah par ja raha hai baha ek din islamik log bhi islam chod doosara dharm apna lege .
प्रत्युत्तर देंहटाएंजो लोग भी सब धर्म को एक बताते है वो इस बात का जबाब दे की भगवान और अल्लाह अगर एक है तो एक गाए खाने और एक गाए पूजने की बात क्यों करता है आखिर एक ही इंसान २ विरोधाभाषी बात क्यों ?
प्रत्युत्तर देंहटाएंi have seen a picture The Message which made after deep discussion with Islamic knowledge persons . the film i have seen is excellent every body must seen it
प्रत्युत्तर देंहटाएंKya hum Hindu (Satya Sanatan Dharma) k sath hi vaha (Kaba) nahi ja sakte ?
प्रत्युत्तर देंहटाएंYadi ja sakte h, to aapne ye kyo kaha ki islam dharan kar lo ?
yadi insaniyat ki bat karte ho to hum bhi insan h, manushya h, human being h...
Aur yadi nahi ja sakte to fir Ye Samanta ki bat kese a gayi Islam me (Jiska aap dava karte h.) ? Ye to sidhi tarah se hi bhedbhav vali baat hui, ki hum ja sakte h tum nahi.
Aur janna ho to yaha bhi dekh sakte h.... http://www.volker-doormann.org/kaaba23.htm
Aur dusri bat ""Pooja" ye shabd sabhi dharmo me apni tarah se define h. Hindu, muslim, sikh, Isai sabhi ka apna puja karne ka tarika alag-alag hota h. Lekin sabhi ek sthan vishesh par jakar apne bhagwan, allah, nanakji, isha masih k kisi pratiroop ya unki vishesh cheez ko kisi tarah se mante h. Sabhi log apni shradhdha se jo kam karte h, vahi puja ya ibadat ya pray h. Ab kaba me bhi aap ajan dete the ya use chumte h, ye aapki shradhdha h, aur hum hindu apni shradhdha se mandir me puja karte h. " To aap bhi vaha puja hi kar rahe h.
Ab aate h aapke murti puja par, - To Saleem ji patthar hindu, muslim, isai sabhi puj rahe h. fark bas itna h, hindu use tarash kar use akar dekar aur bina akar k (Bhagwan Shiv)dono tarah se puj raha h, aur muslims bhi kaba me vahi kar rahe h. Bhale hi aap ye kahe ki aap use chumte h, par vo bhi aapki shradhdha ka hi ek roop h. aap esa sochkar use choom rahe h ki use allah ne chuma tha. hum hindu us patthar me bhi bhagwan ko mante h, aur churches me bhi isha masih hi patthar ki murti hi puji jati.
Tarika alag-alag h, bas bhav ek hi h.
Salim ji aapse yahi kahna chahunga ki is tarah k kutarko ka koi matlab nahi h, aur kisi ki bhi shradhdha aur vishvas k kutark karna me uchit nahi samajhta.
Aap ek scholar lagte h ummid h aapke liye ye link kam ayegi........ http://www.faithfreedom.org/
Mene bhi khud kuchh samay pahle hi iski ek report padi thi, isiliye iske bare me jyada nahi bata sakta ki ye kis tarah ki site h....
muslimo ko anantkaal tak akla nahi aane wali q ki aise mahol mila jo ek sampoorn gawanro ki bhati yani ek janwer hota hai vahi gund hai me nahi manta inke jhuthe majahab ko na islam naam ki koi chij hai na musalmaan ye sab hamri nakal hai in logo ne hamari copy ki hai
प्रत्युत्तर देंहटाएंmuslimo ko anantkaal tak akla nahi aane wali q ki aise mahol mila jo ek sampoorn gawanro ki bhati yani ek janwer hota hai vahi gund hai me nahi manta inke jhuthe majahab ko na islam naam ki koi chij hai na musalmaan ye sab hamri nakal hai in logo ne hamari copy ki hai
प्रत्युत्तर देंहटाएंRniku soni ji
प्रत्युत्तर देंहटाएंpahle nakli our asli me fark karna sikh lo phir
kahna to shobha dega
सेकुलर और मुसलमान क्या चाहते हैं ?
प्रत्युत्तर देंहटाएंसेकुलर शब्द विदेश से आयातित और सबसे अधिक भ्रामिक शब्द है .इसलिए भारत की किसी भी भाषा में "सेकुलर " के लिए कोई समानार्थी और पर्यायवाची अर्थ नहीं मिलता है .लेकिन कुछ चालाक लोगों ने हिंदी में " सेकुलर " का अर्थ " धर्मनिरपेक्ष " शब्द गढ़ दिया था .यदपि इस शब्द का उल्लेख न तो किसी भी धर्म के ग्रन्थ में मिलता है और न ही इसकी कोई परिभाषा कहीं मिलती है .और फिर जब " सेकुलर "शब्द का विपरीत शब्द " सम्प्रदायवादी "बना दिया गया तो यह शब्द एक ऐसा अमोघ अस्त्र बन गया कि अक्सर जिसका प्रयोग हिन्दुओं प्रताड़ित उनको अपराधी साबित करने ,उन पर पाबंदियां लगाने के लिए किया जाने लगा .
इसका परिणाम यह हुआ कि खुद को सेकुलर बताने वाला बड़े से बड़ा अपराधी , और भ्रष्टाचारी लोगों की दृष्टि में दूध का धुला बन गया .और मोदी जैसे हजारों देशभक्त अपराधी लगने लगे .बड़े आश्चर्य की बात तो यह है कि इमाम बुखारी जैसे अनेकों कट्टर मुस्लिम नेता भी " सेकुलरिज्म " की वकालत करने लगे .सेकुलरों और मुसलमानों के इस नापाक गठबंधन का रहस्य समझने के लिए कुरान का सहारा लेना जरुरी है ,
1-सेकुलरों के लक्षण
यद्यपि न तो अरबी में सेकुलर के लिए कोई शब्द है , और न कुरान में सेकुलर लोगों का उल्लेख है , लेकिन कुरान में सेकुलरों के जो लक्षण बताये हैं वह वर्त्तमान सेकुलर नेताओं पर सटीक बैठते है ,
"जब यह लोग मुसलमानों के साथ मिलते हैं , तो उन से कहते है कि हम भी ईमान वाले हैं . और जब एकांत में अपने नेताओं से मिलते हैं ,तो उन से कहते हैं कि हम तो तुम्हारे साथ है .हम तो मुसलमानों से मजाक करते हैं " सूरा -बकरा 2 :14
"हे नबी यह मुनाफिक ( सेकुलर ) जब तुम्हारे पास आते हैं ,तो कहते हैं कि हम मानते हैं कि आप अल्लह के रसूल हो . लेकिन यह लोग सभी के सभी झूठे हैं "
सूरा -अल मुनाफिकून 63 :1
" यह लोग कसमें खाते हैं कि हम तो तुम्हीं में से हैं .जबकि वह किसी के साथ नहीं होते हैं " सूरा -तौबा 9 :56
कुरान में बताये यह सभी लक्षण उन सेकुलरों में मिलते हैं , जिनको कुरान में " मुनाफिक مُنافق" यानि Hypocretes "और हम दोगला कह सकते हैं .ऐसे लोग किसी के मित्र नहीं होते .
2-मुसलमानों की नीति
मुसलमान अपने स्वार्थ के लिए सेकुलरों का सहयोग करते है ,लेकिन कुरान के इन आदेशों का पालन करते हैं , जैसे ,'
" तुम अपने धर्म के अनुयाइयों के अलावा किसी किसी पर भी विश्वास नहीं करो
"सूरा - आले इमरान 3 :73
" तुम अपने लोगों के आलावा किसी को भी अपनी गुप्त योजनाओं के बारे में सच नहीं बताओ " सूरा -आले इमरान 3 : 318
" समझ लो कि यह सब काफ़िर एक दूसरे के संरक्षक और मित्र हैं "सूरा-अल अनफाल 8 :73
( अर्थात सभी काफ़िर एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं )
" तुम इन काफिरों और मुनाफिकों का आदेश कभी नहीं मानना " सूरा अल अहजाब 33 :1
"तुम इन दोगली बातें बोलने वालों का कहना नहीं मानना .यह तो चाहते ही कि तुम किसी भी तरह से अपने इरादों में ढीले पड़ जाओ .और उनकी बातों में फंस जाओ " सूरा -अल कलम 68 : 8 -9
" तुम कभी दोगले लोगों के बहकावे में नहीं आना " सूरा -अद दहर 76 :24
3-मुसलमानों का ढोंग
प्रत्युत्तर देंहटाएंजो मुस्लिम नेता सेकुलर होने का पाखंड करते हैं ,और यह कहते हैं कि हम तो सभी लोगों को समान मानते हैं . और सबकी भलाई चाहते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि मस्जिदों में नमाज के बाद ऐसी दुआएं मांगी जाती है , जैसे ,
"ईमान वालों के लिए उचित नहीं है कि वे मुशरिकों ( मूर्ति पूजकों ) की भलाई के लिए क्षमा ,प्रार्थना करें , चाहे वह उनके मित्र या रिश्तेदार ही क्यों नहीं हों .क्योंकि यह भड़कती हुई आग वाली जहन्नम में जाने वाले हैं " सूरा -तौबा 9 :113
"
مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذِينَ آمَنُوا أَنْ يَسْتَغْفِرُوا لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوا أُوْلِي قُرْبَى مِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُمْ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ " Sura Taubah -. (9:113)
"हमें काफ़िरों के मुक़ाबिले में नुसरत अता फ़रमा।"सूरा - बकरा 2 :250
" وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
अब काफ़िरों के मुक़ाबिले में हमारी मदद फ़रमा।"सूरा - बकरा 2 :286
"فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ"
"काफ़िरों के मुक़ाबिले में हमारी मदद फ़रमा। "आलि इमरान 3: 147
" وانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ "
यह और ऐसी कुरानी दुआएं नमाज के साथ और बाद में की जाती हैं ,इन से मुसलमानों के इरादों का पता चलता है .
4-मुसलमानों का लक्ष्य
आज सेकुलर और मुसलमान इसलिए साथ है ,क्योंकि सेकुलर मुसलमानों के वोटों से अपनी सत्ता बचाए रखना चाहते हैं . और मुसलमान सेकुलरों के सहारे इस देश में इस्लामी राज्य की स्थापना करना चाहते है .जैसा कि कुरान में कहा है .
" तुम गैर मुस्लिमों से तब तक युद्ध करते रहो , जब तक उनका सफाया न हो जाये , और अल्लाह का धर्म ही बाकी रह जाये "
सूरा -बकरा 2 :193
इन तथ्यों से सिद्ध होता है कि मुसलमान सेकुलरों का साथ तबतक देते रहेंगे जब तक उनकी संख्या इतनी कि अधिकांश प्रान्तों में उनकी सरकारें बन जाएँ .और यदि ऐसा हो गया तो मुसलमान इन सेकुलरों को भी नहीं छोड़ेंगे .
याद रखिये जिन मुसलमान बादशाहों ने हुमूकत के लिए अपने बाप , और मुहम्मद के परिवार के लोगों जिन्दा नहीं छोड़ा वह मुनाफिक सेकुलर लोगों को कैसे जिन्दा रहने देंगे ?
http://wikiislam.net/wiki/Qur%27an,_Hadith_and_Scholars:Friendship_with_Non-Muslims
Islam Lies
प्रत्युत्तर देंहटाएंIslam..a Beast
They start accumulating in countries and then start terrorizing it with gangs of rapists, violence and civil disruption.
They are possessed, demon possessed. They seek to spread fear and violence, they are pawns of the devil who feeds off of the fear and suffering they create for power.
Just as their leader, Mohammad, they use "God" as an excuse to prey on innocent people. Mohammad was a robber and a thief, his followers are no different.
It is not the Most High God they serve, but Satan.
Don't you think the Arabs make it hard for themselves to garner sympathy from the western civilized nations when all they do is preach the death and destruction of those very nations?
See the Koran Film: http://www.youtube.com/watch?v=bCrCsTMokTU&feature=related
Their religion is one of hate, not love. The Talmudic Jews preach that anyone not a (Kazaar) Jew as they are should be killed. Should we let the two races alone to just go at it amongst themselves and kill each other off?
Every religion thinks they are the only ones serving the true God and going to heaven. The Jews, the Moslems, the Catholics, the Protestants. God does not live in a book, He lives in the hearts of those who truly love and worship Him. Religions are used to manipulate and control mankind to further political agendas.
Get out of RELIGION and get into a RELATIONSHIP with the One true God. Ask HIM to teach you the truth in ALL things.
There are 5 Beasts Coming: An Arab beast, an Aramean Beast, an Aryan Beast, a Black Beast, and a Female Beast.
प्रत्युत्तर देंहटाएंMuslim activists in the West have been using the tactic of claiming that they worship the same god as the Christians in order to gain legitimacy and acceptance. They have been using the name "God" in place of "Allah" in many translations of the Qur'an.
Muslims DO NOT pray to the same God (Yahweh/ Jehovah of Holy Scripture) of Christians and Jews! Yahweh is transliterated from the Hebrew YHVH.
Before Muhammad the Arabs had 365 gods - one for each day of the year. Muhammad picked Allah (the Arab moon god).
They claim the founder of Islam is a prophet named Muhammad...however Muhammad himself says he is not a prophet and has never personally heard from God...in fact Muhammad who heard voices thought himself it was from evil spirits....his wife encouraged him to change his mind and claim God had spoken to him...
Muhammad was a pedophile, having sexual relations with a 6 year old and 9 year old girl.
Muhammad performed no miracles, spoke no prophecies,
and died like all mortal men
Islam claims the Prophet Muhammad was foretold in the Torah and Bible:
The coming of Prophet Muhammad had been foretold in the Torah. God had said to Moses: "I will raise them up a Prophet from among their brethren, like unto thee, and I will put My words in his mouth; and he shall speak to them all that I shall command him" Deuteronomy 18:18
This was fulfilled in John 1:45, "We have found him, of whom Moses in the law, and the prophets, did write, Jesus of Nazareth, the son of Joseph." Nope..not Muhammad! It was Jesus of Nazareth!
ooops...
There are more than 100 verses in the Qur'an (Koran) advocating the use of violence to spread Islam. There are exactly 123 verses in the Qur'an about killing and fighting.
प्रत्युत्तर देंहटाएंQur'an 9:5, known as "the verse of the sword," declares, "Fight and slay the pagans wherever you find them, and seize them, beleaguer them, and lie in wait for them in every stratagem."
The Koran was written 500 years after the Bible and Muhammad couldn't get his history straight? Who was talking to his head? Certainly wasn't the Most High God.
The Moslems consider the Qur’an as uncorrupted. Yet it's historical and scientific blunders are numerous..
Islam teaches that Hagar was Abraham's first wife..the Torah says Hagar was Sarah's handmaiden, or bondwoman.....Hagar was never Abraham's wife..she was a maid...a servant...who had a child for Abraham because Sarah was barren and couldn't conceive. Eventually Sarah did conceive and Hagar was cast into the desert with Ishmael her son.
The Muslims misquote the Bible claiming the "freewoman" wife of Abraham was Hagar when it was Sarah. Hagar was the bondwoman, servant of Sarah. In other words, Sarah was Abraham's wife, Hagar was his mistress. When Isaac was born, Ishmael and Hagar were cast away from Abraham and sent into the desert away from him and Sarah.
Ishmael was promised to be a great nation, and today he is, but the blessings of Abraham and Yahweh's covenant went through Isaac and his seedline. Biblically speaking, the land of Israel rightfully belongs to the Jews because God promised and gave the land to Abraham, the Father of the Jews, and renewed this promise or covenant to Abraham's son Isaac and to Isaac's son Jacob (later renamed Israel by God) who begat twelve sons from whom the twelve tribes of Israel was established as a nation as described in Genesis 12:1-3; 17:7,8 and 17:19-21.
The state of Israel is a constant reminder to the world that the God of Abraham, Isaac, and Jacob is alive and that one billion Arabs can't keep them from possessing their promised land.
Was Jesus the ONLY Begotten Son of God? Yes. "For God so loved the world that He gave HIS ONLY Begotten Son, that whosoever believeth IN HIM should not perish, but have everlasting life - John 3:16...not through Muhammad, it was Jesus, Yahushua.
Did Jesus die on the cross? Yes. Matthew chapters 27&28 talk about his death and resurrection. Jesus defeated death when he arose from the grave 3 days later. Muhammad's tomb still holds his body, Jesus' does not! His tomb is empty!
Islam misquotes and teaches that Muhammad was prophesied..The Bible says,
"But the Comforter, which is the Holy Ghost, whom the Father will send in my name, he shall teach you all things, and bring all things to your remembrance, whatsoever I have said unto you" (John 14:26). Not Muhammad..the Holy Ghost..Holy Spirit..
"For there is one God, and one mediator between God and men, the man Christ Jesus" (I Tim. 2:5).
Historical errors in the Qur'an:
प्रत्युत्तर देंहटाएंThe Historical, Scientific, simple mathematics and theological contradictions in the Qur'an are too numerous to list. Remember, since Muhammad already proclaimed the Jewish Torah/Christian Old Testament (Taurat) as correct in Qur'an 5:46/47 and 43:63 then the following gross errors that differ with the Torah are inexcusable. These errors their selves scream out the Qur'an itself is entirely false. Here are just a few:
In Sura 2:241 Muhammad confuses the persons of Saul and Gideon.
In Sura 2:55-60 the Israelites were said to be "a scanty band" vastly inferior to the Egyptians. But in Exodus 1:7-10 the Egyptian king said to his people that the Israelites had become "more and mightier than we".
The Koran confused the sister of Moses (Miriam) with Mary, the mother of Jesus. In Hebrew, Miriam and Mary are the same names.
How many angels were talking to Mary? When the Qur'an speaks about the annunciation of the birth of Jesus to the virgin Mary, Sura 3:42,45 speaks about (several) angels while it is only one in Sura 19:17-21. The Christian Bible clearly indicated one angel; "In the sixth month, the angel Gabriel was sent by God to a town in Galilee called Nazareth," Luke 1:26
Muhammad taught that Mary the mother of Jesus was the sister of Aaron and Moses - who lived 1,500 years earlier.
Do you remember the evil Persian Haman who conspired to kill all the Jews during the time of Esther in the Babylonian captivity. In the Koran, Muhammad incorrectly taught that this wicked man Haman was the prime minister of the Egyptian Pharaoh. Throughout the Quran--Nimrod and Abraham, Haman and Moses, Mary and Aaron, the tower of Babel and Pharaoh were all pictured as living and working together. Moses and the flood are also incorrectly found together. Muhammad thought these all happened at the same time.
What about Noah's son? According to Sura 21:76, Noah and his family is saved from the flood, and Sura 37:77 confirms that his seed survived. But Sura 11:42-43 reports that Noah's son drowns.
Sura 7:136, 7:59 say Noah's flood took place in Moses' day. Did anyone tell Moses that?
Sura 14:37, says Abraham lived in the valley of Mecca. The Bible says he lived in Hebron, Israel. (Genesis 13:18, 23:2, 35:27)
Sura 7:54, 10:3, 11:7, and 25:59 clearly state that God created "the heavens and the earth" in six days. But in 41:9-12 the detailed description of the creation procedure adds up to eight days.
Suras 21:51-71; 37:97,98, says that Abraham was thrown into a fire [by Nimrod]. Nimrod and Abraham did not live at the same time. Muhammad was always mixing people together in the Qur'an who did not live at the same time. The Bible tells us Nimrod lived many centuries before Abraham.
Sura 6:74, says Abraham (called millata-Ibrahim in the Qur'an) father's name was Azar. The Bible says it was Terah (Genesis 11:27).
Sura 12:21ff, says the man who bought Joseph was named Aziz. The Bible says it was Potiphar.
Sura 37:100-112, says Abraham went to sacrifice Ishmael. The Bible says it was Issac.
Sura 5:73-75,116, Muhammad mistakenly thought the Christian Trinity was 3 gods: the Father, the Mother (Mary), and the Son (Jesus).
Sura 28:8-9, says is was Pharaoh's wife who adopted Moses. The Bible says it was Pharaoh's daughter.
Sura 9:10, incorrectly says Zacharias could not speak for only three days.
Sura 20:87, 95, says the Jews made the golden calf in the wilderness at the suggestion of Samaritans. There were no Samaritans at that time
http://islamlies.com/
प्रत्युत्तर देंहटाएंThe message of this video targets people from all religious backgrounds therefore representatives of the 4 major religions - Krishna, Muhammad, the Buddha and Jesus are starring as "those who knew the Truth". However, not necessarily all 4 are such.
प्रत्युत्तर देंहटाएंThe film is available in one file at megaupload:
http://www.megaupload.com/?d=8LFVRL79
English subtitles for part 1/2 - SRT file:
http://sites.google.com/site/triplexity/1/Religion-P1.srt?attredirects=0&d=1
Religion 1/6
Music : Sulatus
http://www.jamendo.com/en/artist/sulatus
http://www.youtube.com/watch?v=S-4pYoL8gj4&feature=relmfu
प्रत्युत्तर देंहटाएंhttp://www.volker-doormann.org/kaaba23.htm
प्रत्युत्तर देंहटाएंsee the haram symbol and see how the construction matches with shiva temple a scientific region
*****हम मुस्लिम विरोधी नहीं हैं*****
प्रत्युत्तर देंहटाएं..."बढती धार्मिक वैमनष्यता के कारण और निवारण के उपाय "...
...हर बुराई का विरोध और हर अच्छाई का समर्थन करने का साहस है हममें
1.हम अपने सच्चे मुस्लिम को रोजा अफ्तार की दावत भी देते आये हैं
2. ईद और दीपावल
ी की मुबारकबाद भी लेते देते हैं हम लोग
3. आपस के सुख दुःख भी बाँटते हैं हम लोग
.........................................पर फिर भी ...कुछ सवाल हैं .
.... जो उठ खड़े होते है ... और परेशान करते हैं दिमाग को
........... की कहीं हम गलत तो नहीं
प्लीज मदद कीजिए ........ भाईचारे को बचाने के लिए
..... जो भी बुद्धिमान जबाब दे सकें .... हम उनके अहसानमंद रहेंगे
***सवाल***???
..........
1.क्या मुसलमान भी हिन्दू को भाई समझता है ...???
>> ..."काफिर"... का अर्थ स्पस्ट करें.
>> देवी,देवताओं के बारे में अपनी राय दें.
>> मंदिर की घंटी,शंख,घड़ियाल से आपत्ति क्यों...???
>>मुस्लिमों बहुल क्षेत्रों में भाईचारा क्यों नहीं...???
>>धर्म आधारित बटवारे के बाद भी अपना भाई मानते हुए अपना सारा देश ..."सांझा"...करने वाले ..."भाई के भगवान"... को भगवान नहीं मानते हुए उसीकी जन्मभूमि पर अपना अधिकार जाताना किस भाईचारे की मिसाल है.
>> अरे बटवारे के बाद जब देश ही त्यागने की नोबत थी तब हिन्दू ने भाईचारा मानते हुए अपने पूरे देश पर सामान अधिकार दे दिया उस भाई को भाईचारे की मिसाल देने के लिए रामजन्मभूमि क्यों नहीं त्याग देते मुस्लिम.
...........
2.मुस्लिम की निगाह में हिन्दू को समानता का अधिकार क्यों नहीं...???
>> भारत में शिक्षक,ग्रामसेवक से लेकर ..."राष्ट्रपति"... तक मुस्लिम रहे हैं ...मुस्लिम देशो में हिन्दू को यह अधिकार मिल पायेगा क्या...??
>> मुस्लिम हित के लिए हिंदू राज नेता हो या हिन्दू समाजसेवी या हिन्दू साधू संत ...... सदा ही संवेदनशील रहे हैं ........... पर हिन्दू हित के लिए संवेदनशीलता का कोई उदाहरण मिल पायेगा मुस्लिमों से
>> मुस्लिमों पर अत्याचार के विरुद्ध सदा ही मुस्लिमों के साथ हिंदुओं ने विरोध के स्वर मुखर किये हैं घटना बड़ी हो या छोटी से छोटी .... क्यों हिन्दुओ पर अत्याचार के विरुद्ध नहीं बोल पाते मुस्लिम .... कभी भी
>> कभी भी किसी बड़े ओहदे पर बैठे मुस्लिम शख्स ने मुस्लिमों के द्वारा हिन्दुओ पर किये गए जघन्य अपराधों पर विरोध ब्यक्त कराया है क्या...???
>> हिन्दुओ की प्रताडना के विरुद्ध मुस्लिम संगठन आगे आये कहीं भी, कभी भी...... नहीं तो क्यों नहीं ......
कहाँ होता है ..."भाईचारा"... तब
..........
3.भारत सहित विश्व में मुस्लिमों की बडती संख्या .... और इसके विरुद्ध ... मुस्लिम बहुल क्षेत्रो में हिंदुओं की घटती संख्या ..."भारत या अन्य मुस्लिम देश"... ऐसा क्यों बता सकते हैं इसके कारण ...???
..........
....कारण तो और भी बहुत हैं जो विचार योग्य हैं यदि वैमनष्यता खत्म करना है भविष्य को सुरक्षित रखना है तो सभी धार्मिक नेताओं को,राजनेताओं को ..."तुस्टीकरण"... की नीति त्यागना होगा अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहना होगा."
अधिकांश गैर मुस्लिम लोगों को अल्लाह और इस्लाम के बारे में पुरी जानकारी नहीं होती है .लोगों को अल्लाह और इस्लाम के बारे में वही जानकारी होती है ,जो वह फिल्मों और टी वी चेनलों में देखते हैं.चालाक मुस्लिम ब्लोगर अपने ब्लोगों में इस्लाम के बारे में प्रचारित करते है .इस झूठे प्रचार के कारण कुछ लोग खुद को सेकुलर मानने लगे हैं.और अल्लाह को ईश्वर कहने लगे हैं .इन लोगों को अल्लाह के बारे में न तो यह पता है
प्रत्युत्तर देंहटाएंकी अल्लाह का कैसा स्वभाव है ,और उसे क्या पसंद है .और वह किस चीज से नफ़रत करता है .या किस बात को नापसंद करता है .हम आपको अल्लाह की पसंद और नापसंद की कुछ बातें संक्षिप्त में दे रहे है -
अल्लाह को पसंद है ----
1 मस्जिदें बनवाना
2 लोगों को डराना
3 अपनी तारीफ़ करवाना
4 मुसलामनों के मुंह की सडांध
5 लोगों को बीमार करना
6 मर्दों के गर्दन तक लटके बाल
7 मुसलमानों के गंदे पैर
8 लड़ाई ,जिहाद
9 लूट का माल
अल्लाह को नापसंद है ----
1 संगीत ,वाद्य
2 सवाल करना
3 औरतों का सम्भोग से इंकार
4 यहूदी ,ईसाई
5 शिक्षा ,पढाई
6 खेती करना
7 गैर मुस्लिमों से दोस्ती .करना .
अब आपको इसके बारे में प्रमाणिक हदीसों और कुरआन से सबूत दिए जा रहे हैं ------
1 -मस्जिदें बनवाना ---
"रसूल ने कहा कि जो व्यक्ति जितनी भी मस्जिदें बनवायेगा,अल्लाह उसके लिए जन्नत उतने ही मकान बनवा देगा " बुखारी -जिल्द 1 किताब 8हदीस 441.
"शुक्रवार के दिन फ़रिश्ते मस्जिद के दरवाजे पर आ जाते हैं ,और लोगों के आने का इंतजार करते है.और मस्जिद बनवाने वाले को दुआ देते रहते हैं .इस से अल्लाह खुश होता है."बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 433 .
"अल्लाह को बाजारों से नफ़रत ,और मस्जिदें पसंद है ".मुस्लिम -किताब 4 हदीस 1416.
2 -लोगों को डराना ---
"अबू मूसा ने कहा कि ,रसूल ने बताया कि अल्लाह चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण इसलिए करता है कि लोग डर जाएँ ,और डर के मारे अल्लाह को पुकारने लगें "बुखारी -जिल्द 2 किताब 18 हदीस 167.
3 -अपनी तारीफ़ करवाना ---
"अबू हुरेरा ने कहा कि रसूल ने कहा कि अल्लाह अपनी तारीफ़ सुन कर खुश होता है .अल्लाह अपनी जीतनी इज्जत और तारीफ़ खुद करता है ,उतनी कोई दूसरा नहीं कर सकता .अल्लाह को अपनी तारीफ़ पसंद है"मुस्लिम -किताब 37 हदीस 6647 और 6648.
4 -मुंह की बदबू और सड़ांध ---
"अबू हुरेरा ने कहा कि , रसूल ने कहा कि अल्लाह को रोजेदार मुसलमानों के मुंह से निकलने वाली बदबू और सडांध बहुत पसंद है .अल्लाह को उस बदबू में मुश्क की खुश्बू आती है."बुखारी -जिल्द 7 किताब 72 हदीस 811.
5 -लोगों को बीमार कर देना ---
"रसूल ने कहा कि अल्लाह अपने मुस्लिम बन्दों को ,कोढी,अंधा और गंजा कर देता है .और उनको बीमार कर देता है .ऐसा करके अल्लाह ईमानवालों का इम्तिहान लेता है "मुस्लिम -किताब 42 हदीस 7071 और अबू दौउद-जिल्द 2 किताब 20 हदीस 2083.
..................
6 -मर्दों के लम्बे बाल ---
प्रत्युत्तर देंहटाएं"इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने बताया कि,अल्लाह को रसूलके गर्दन से नीचे लटके हुए बाल बहुत पसंद है ,क्योंकि अहले किताब (यहूदी ,ईसाई )नेनबियों के ऐसे ही बाल थे .और यह देखकर रसूल ने भी वैसे बाल रख लिए "बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 758.
7 -गंदे पैर ---
"रसूल ने कहा कि अगर किसी जिहादी के पैर जिहाद के कारण मिट्टी और धूल से घुटनों तक सने होंगे ,तो अल्लाह ऐसे पैरों को पसंद करेगा ,नाकि धुले हुए साफ पैरों को"बुखारी -जिल्द 2 किताब 13 हदीस 30.
8 -लड़ाई करना और जिहाद करना ---
"अबू मूसा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि जो मुसलमान हमेशा अल्लाह के नाम पर लड़ता रहता है ,और जिहाद करता है ,तो अल्लाह उसे सबसे अधिक पसंद करता है .और जन्नत में उसे ऊंचा दर्जा मिलेगा "बुखारी-जिल्द 1 किताब 3हदीस 125.
9 -लूट का माल ---
"जुबेरिया बिन कदम ने कहा कि उस समय मदीना के लोग अक्सर जिहाद करते थे,और और लोगों से जबरन जकात और जजिया वसूलते थे .रसूल कहते थे कि इस से अल्लाह खुश होता है"बुखारी-जिल्द 4 किताब 53 हदीस 388.
"अबू हुरेरा ने कहा कि रसूल लूटके माल से धनवान हो गए थे .उनके पास कई मर्द और औरतें गुलाम थे..तसूल कहते थे कि मुझे धनवान देखना अल्लाह को पसंद है,बुखारी -जिल्द 3 किताब 37 हदीस 495.
अब आपको बताते हैं कि अल्लाह को कौन सी बातें नापसंद हैं ,या किस बात से नाराज होता है.देखिये ----
1 -संगीत और वाद्य ---
"रसूल ने कहा कि,घंटी बजाना ,और संगीत के वाद्य शितन के काम हैं,और अल्लाह को नापसंद हैं.मुस्लिम -किताब 24 हदीस 5279."अबू मालिक ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,जो व्यक्ति संगीत का आनद लेगा ,और बाजे बजाएगा ,और रेशम के कपडे पहनेगा ,अल्लाह उसे बर्बाद कर देगा .और उसे सूअर और बन्दर बना देगा.बुखारी -जिल्द 7 किताब 69 हदीस 49.
2 -सवाल करना --
"रसूल ने कहा कि जो भी व्यक्ति अल्लाह के बारे में सवाल करेगा तो वह शैतान के प्रभाव में है,अल्लाह को उसके बारे में सवाल करना पसंद नहीं है .बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 496 और मुस्लिम -किताब1 हदीस 242 -243.
3 -औरतों का सम्भोग से इन्कार ---
"अबू हुरेरा ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि ,अगर कोई औरत अपने पति के कहने पर तुरंत सम्भोग के लिए तैयार नहीं होती ,तो उस से अल्लाह नाराज हो जाताहै .और जब तक वह सम्भोग नही करवा लेती,अल्लाह उसे धिक्कार करता है .मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3367 -3368.
"रसूल ने कहा कि,औरत को पति के कहने पर सब काम छोड़कर तुरंत सम्भोग के लिए टायर हो जाना चाहिए .यदि वह पति के साथ ऊंट के हौदे में हो तो उसी पर सम्भोग करावा लेना चाहिए.वरना अल्लाह नाराज होगा.इब्ने माजाकिताब 3 हदीस 1853 -1855.
4 -यहूदी और ईसाई ---
"अलाह को यहूदियों और ईसाइयों से इतनी नफ़रत हुई कि ,उन्हें बन्दर और सूअर बना दिया .कुरआन.सूरा मायदा 5;60.
"सलीम बिन अब्दुलाह ने कहा कि,रसूल ने कहा ,अगर यहूदी और ईसाई दुआ करेंगे तो अल्लाह उसका आधा सवाब मुसलमानों को दे देगा .अल्लाहको वे लोग पसंद नहीं हैं.बुखारी -जिल्द 1 किताब 10 हदीस 352.
5 -शिक्षा और पढ़ाई ---
"अता बिन यासर की रवायत है कि,अल्लाह को शिक्षा से नफ़रत है ,वह अशिक्षा और पसंद करता है.बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 355.
"मूसा बिन इस्माइल अल बहरीने कहा कि,रसूल ने कहा कि अल्लाह अन पढों को इसलिए पसंद करता है,क्योंकि उसका रसूल भी खुद को अनपढ़ कहता है.अल्लाह यह नहीं चाहता कि कोई रसूल से अधिक पढ़ जाये.मुस्लिम -किताब 1 हदीस 264.
6 -खेती करना ---
"अबू उमामा ने कहा कि रसूल ने कहा कि,अल्लाह को खेती की जगह जिहाद,और औजारों कि जगह हथियार ज्यादा पसंद हैं .जो खेती को छोड़कर जिहाद करेगा अल्लाह उसे पसंद करेगा.बुखारी -जिल्द 3 किताब 39 हदीस 514.
7-गैर मुस्लिमों से दोस्ती ---
"ईमान वालों को चाहिए कि वह काफिरों को दोस्त न बनायें.कुरआन .सूरा आले इमरान 3 :28
अब इस पूरे विवरण को पढ़ने के बाद आपको अल्लाह की पसंद और नापसंद के बारे में अच्छी तरह से पता चल गया होगा ..यह लेख वह लोग जरुर पढ़ें जो सेकुलर हैं .और अल्लाह को ईश्वर मानाने भूल कर रहे हैं.
Vishal Raj
प्रत्युत्तर देंहटाएंपरम पिता परमेश्वर एक रास्ते अनेक फिर क्यों विवाद |
परम पिता परमेश्वर खुदा,अल्लाह,गोड सभी तो परमात्मा की ओर पहुचने के रास्ते हैं,फिर यह मजहब,धर्म को लेकर विवाद क्यों ?, हिन्दू धर्म में साकार,निराकार,और भिन्न देवी देवता हैं,जिसकी परमात्मा की ओर पहुचने की रूचि है,वोह उसी प्रकार से उस सर्वशक्तिमान की ओर पहुचने के लिए प्र्यतानशील है,हिन्दू धर्म में साकार स्वरूप की भक्ति करने वालों का विवाद निराकार भ
क्ति करने वालों से श्रेष्ठता को लेकर विवाद होता रहता है,और साकार स्वरुप की भक्ति करने वालों में भी अपने,अपने स्वरुप के ईश्वर को लेकर विवाद होता रहता है,और नवधा भक्ति को लेकर विवाद होता रहता है कि कर्म योग,भक्ति योग,ध्यान योग इत्यादि में इस प्रकार की भक्ति श्रेष्ठ है या उस प्रकार की भक्ति श्रेष्ठ है, फिर पन्थो को लेकर विवाद कबीरपंथ,जैन पंथ,बौध धर्म इत्यादि में यह पंथ श्रेष्ठ है या वोह पंथ|
सब में ईश्वर का अंश अविनाशी आत्मा है,और फिर क्यों ब्राहमण,क्षत्रिय,वैश्यों और शुद्र में क्यों यह जाती सबसे ऊपर है,या वोह जाती निम्न है, जब सब में ईश्वर का अंश आत्मा है,तो इन जातियों में भेद भाव तो होना ही नहीं चाहिए,सब जातियां बराबर हैं
संत कबीर दास के अनुसार तो "हरी को जो भजे हरी का होई" |
इसलाम को लिया जाये तो वहाँ शिया और सुन्नी में मतभेद समझ में नहीं आता है ऐसा क्यों है ?हैं तो आखिर दोनों मुस्लिम संप्रदाय,एक पहले से शिया जो मुस्लिम संप्रदाय में आतें हैं,और सुन्नी जो कि सुन कर मुस्लमान हुएं हैं,क्या इनके लिए खुदा,अल्लाह पीर,पैगम्बर जुदा है ? यदि खुदा,अल्लाह पैगम्बर,पीर जुदा नहीं हैं,तो आपस में क्यों एक मुस्लिम सम्प्द्रय एक दुसरे को अपने को बेहतर क्यों बतातें हैं ?
इसी प्रकार अगर इसाई धर्म को मानने वोलों में भी,मतभेद क्यों ? इस इसाई धर्म की भी अनेक शाखाएँ हैं, केथोलिक,
प्रोटेस्टेंट,एडवेनटिस्ट,इत्यादि क्या इन इसाई धर्म को मानने वालों के लिए जिसयस अलग है,या खुदा कहें या गोड कहें क्या वोह अलग है,फिर आपस में यह कहना कि यह रास्ता अच्छा है,या वोह रास्ता अच्छा है,कहाँ तक ठीक है ?|
सबकी रगों में खून का रंग एक,सब के लिए धुप,छाओं,गर्मी,सर्दी बरसात एक,ईश्वर,भगवान,गोड,खुदा ने तो कोई पक्षपात नहीं किया,फिर कब समझोगे,सब इंसान एक हैं,परम पिता,परमेश्वर,गोड,खुदा के सब बच्चे हैं,धर्म तो उस सर्वशक्तिमान के पहुचने की,अलग,अलग सिड़ी है,जो परमेश्वर से मिलाने के जरिये हैं,परन्तु आपस में,मतभेद,बैर,लड़ाई,झगड़ा धर्म को लेकर और इंसानियत को भूल जाने पर,यह सिड़ी कहीं भी नहीं ले जाएगी |
अंत में इस कहानी से करता हूँ, एक महावत के पॉँच अंधे बेटे थे,एक दिन महावत ने अपने बेटों से कहा,इस हाथी को स्नान करा दो,उसके अंधे बेटे लग गये उस महावत के हाथी को नहलाने में,जब उसके बेटे हाथी को नेहला चुके तो उस महावत के अंधे बेटों में हाथी को लेकर झगड़ा होने लगा हाथी ऐसा,हाथी वैसा है,जिसके हाथ में हाथी के पैर आये उसने कहा हाथी चार खम्बो जैसा है,जिसके हाथ में हाथी के कान आये उसने कहा हाथी,केले के बड़े,बड़े पत्तों की तरह है, जिसके हाथ में हाथी की सूंड आयी उसने कहा,हाथी एक उस तरह के खम्बे की तरह है जो नीचे से पतला होकर जैसे,जैसे ऊपर जाओ तो मोटा होता जाता है,जिसके हाथ में हाथी के दांत आये वोह बोला हाथी तो हड्डियों से बना हुआ है,जिसके हाथ में हाथी की पूँछ आयी वोह बोला हाथी एक रस्सी की तरह है,जो स्वर्ग,जन्नत,हेवन से लटक रही है, क्योंकि हाथी की पूँछ ऊंचाई पर थी इसलिए उसने ऐसा कहा |
महावत ने जब उनको झगड़ा करते हुए देखा तो उसने कहा तुम सब आंशिक रूप से ठीक कह रहे हो, हाथी इन सब वस्तुओं का सम्मिलित रूप है,तो भाई बहनों, हाथी को उन महावत के बेटो ने अलग,अलग तरह से पहचाना तो यह अलग,अलग तरह के धर्म,सम्पर्दाय अलग रास्ते हैं,उस परम पिता परमेश्वर की ओर पहुचने के,जैसे नदी सागर में मिलने के बाद अपना सवरूप भूल जाती है, उस नदी में बहुत,वेग होता है,इठलाती है,अलग,अलग नदियाँ होतीं हैं, और जब उस शांत सागर में मिलती हैं,तो अपना स्वरुप भूल जातीं हैं,ऐसे ही जब मानव परमात्मा में लीन हो जाता है,तो इन धर्म,सम्पर्दय इत्यादि का कोई महत्व नहीं रह जाता है, और जब आत्मा जो की परमात्मा का स्वरूप है,उसी में लीन हो जाती है,तो मानव निर्मित धर्म,सम्प्रदाय को कोई महत्व नहीं रह जाता है |
आत्मा अंश जीव अविनाशी,उस अविनाशी ईश्वर का स्वरुप है |
BHAGWAN SHIV KAWA MAIN TO VIRAJMAAN HAIN HI SATH MAIN IN MUSALMANO KE DILL MAIN BHI VRAJMAAN HAIN KYUNKI INKA SABSE BADA TIRTHSTHAL KAWA HAIN JAAB KAWA MAIN SHIV VIRAJMAAN HAIN TO ISKA MATLAAB IN KE DILL MAIN TO 101 PERSENT HONGE HI
प्रत्युत्तर देंहटाएंHAMANE BAHUT DOTSO KE LEKH DEKHE KI HAM SRESTH HAI HAM SRESTH HAI
प्रत्युत्तर देंहटाएं1. KI HAMARA KABA PATTHAR MAKKA ME MUSLMAN BHAI CHUMATE HAI LEKIN YEKY NAHI BHULATE KI HAMARE SANATAN ME RAM SETU ME ESE PATHTAR KA BHARAT SE SRILANKA TAK PUL BANA HAI YE HAMARE DHARM KA EK CHHTA SA SACHHY HAI KI HAM KITANE SRESTH HAI JO EK TUKADE PAR ITNA LIKH RAHE JO VIGYAN AJTAK YE PATA NAHI KAR PAYA KI YE PUL KESE BANA HOGA
2.YE SAVAL UNASE POCHATE HAI KI KYA MUSALAMAN BHAI KAHATE HAI KI HAM INSAN HAI HAMARE DHARM ME INSANIYAT HAI TO YE BATAO
1.KI TUMAHARA AGAR ALLA DVARA LIKHA GAYA DHARM HAI LEKIN USAME INASINIYAT HAI KAHA
2.JAB MUHMAD GORI KO 17 BAR HARA KE HAMANE CHHOD KE HAMANE APNI INSANIYAT TO DIKHA DI THI OR INOHONE KAYARTA
3.YE SAVAL UNASE JO HAMASE SAMAN KI BAT KARATE HAI UNASE POOCHTA HU KI HAMANE TO KABHI ITHAS ME MASJID NAHI TODI LEKIN TUMANE TO ITANE MANDIR TOD DI KYO KYA AP KO RACHHAS NA KAHA JAE JO BE MATALAB DHAN DOLAT KE LIYE SAB KAR GAYE ISSE TO HAMAKO LAGATA KI TUMAHARE DHARM JANAVAR NE LIKHA HOGA
4.EK OR SAVAL YADI AP LOG YADI YE SICHATE HAI KI HAM VIGYAN ME PEECHE RAHE HONGE ME UNASE EK SAVAL POOCHATA HU KI JO DHARM ME SHONY DASAMLAV SE LEKAR ANNT KI KHOJ KI HO USAKE LIYE KYA ASMABHAV THA OR KUCHH BACHA THA JO AJ VIGAYAN UANASE HI SARE KAM KARATI HAI.
5. JO LOG KAHATE HAI KI MANU SMARTI ME OR ISLAM ME EK BAT LIKHI HAI TO MUJHE EK R SAVAL KA JABAB DO HAMARI MANU SAMARTI ME TO KEVAL DASH VAKY SACHH HAI VO INSANIYAT KE JO HAMANE DIKHAYE BHI LEKIN APKE DHARM ME TO SEEDHE HI BAKAR IAD MANA TE HAI KYO
6.YE LOG KAHATE HAI KI ALLAH NIRAKAR HOTA HAI UNASE POCHTA HAI JO MAA-BAAP JANM DETE HAI V NIRAKAR HOTE HAI HAMARE DHARM ME TO MA BAAP KO BHAGVAN KA ROOP MANATE HAI LEKIN APKE ITHAS ME TO BETA MAR KE BAP KE JAGAH BETH GAYE MUJHE LAGATA KI ISILIYA TUMHARE ALLAH NE APNA AKAR NAHI BATAYA KI NAHI TO AP USKA BHI KATAL KAR DETE .ISILIYE TO BOYA PED BABOOL KA AMB KAHASE KHAY ISI KARAN MOHAMAD KA POORA PRIVAR HI NIPATA DIYA JO BETA BAP KA NA HUA VO KISAKA HOGA
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प्रत्युत्तर देंहटाएंKABA ME SIRF BHAGWAN SIV HAI. KYO KI ESLAM KA UDAY 1500 SAL PEHLE HUA.. LEKIN DUNIYA KA SAB SE PURANA DHARM HINDU HAI.HINDU SIV JI KO PITA MANTE HAI. UN KA NAM SIV. 1500 SE PEHLE SIV NAM DIYA GYA. DHANYBAD
प्रत्युत्तर देंहटाएंgeta me dharm yudh ke bare me likha hai.kuruk chetra me 5 pandaw sahee the es like unhe geta me dharm yodha kha kya hai,,na ke kise dharm ka sabd hindu ya or koe sabd..
प्रत्युत्तर देंहटाएंअरे भाई, इतना भी मत कोसो इन ईस्लामियोंको कि ये खुद को बिमार मरीज मत समझ बैठे खुदको ा इन्हें सम्हलनेके कुछ मौके तो दे दो.....
प्रत्युत्तर देंहटाएंteri maa ki chut saale porkii
प्रत्युत्तर देंहटाएं